लोकमित्र केंद्र गिन रहे अंतिम सांसें, क्या ऐसे डिजिटल इंडिया का सपना हो पायेगा साकार??

लोकमित्र केंद्र गिन रहे अंतिम सांसें, क्या ऐसे  डिजिटल इंडिया का सपना हो पायेगा साकार??

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 12 Feb, 2019 01:01 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा शिमला शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश(मोनु राष्ट्रवादी)

कंप्यूटर के इस युग में हिमाचल में डिजिटल सेवाएं अपनी अंतिम सांस गिन रही है। लोकमित्र केंद्र के माध्यम से घरद्वार सेवाएं उपलब्ध करवाने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2002-03 में हिमाचल में लोकमित्र केंद्रों को शुरू किया गया था जिसका जीएनजी व जूम डेवलपर कम्पनी ने बीड़ा उठाया था परंतु जिस तर्ज पर ये कवायद शुरू हुई थी धरातल पर वो फिस्सडी साबित हुई।

वर्तमान में सूबे में 3226 लोकमित्र केंद्र हैं जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक केंद्रों में चाय के स्टाल खुल चुके हैं जिसकी वजह सरकार की बेरुखी भरा रवैया है। लोग आज भी अपनी रोज़मर्रा की सेवाओं के लिए मीलों दूर चलकर साइबर कैफे में मनमाने मूल्य चुका रहे हैं।

आलम यह है कि नई सरकार को एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है लेकिन सरकार की IT की वेबसाइट पर आज भी विद्या स्टोक्स का ही नाम है जबकि वर्तमान में IT विभाग के मंत्री राम लाल मार्कण्डेय हैं जबकि जे.सी. शर्मा सचिव हैं।

लोकमित्रों का आरोप हैं कि उनका सर्वर पिछले कई महीनों से काम नहीं कर रहा है। सरकार द्वारा उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए मिलने वाला कमीशन ऊंट के मुह में जीरे समान है।

उधर लोकमित्र यूनियन  के मीडिया प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री को लिखे खत में कहा है कि आपसे पहले भी लोकमित्र परिवार मिल चुका है आज आपसे कुछ छुपा नही आज लोकमित्र साथियों की दयनीय हालत के चलते लोकमित्र को चलाना मुश्किल हो रहा है।

कुछ लोकमित्र कर्ज तले दबे हुए बन्द हो गए कुछ बन्द होने की कगार पे आ गए है। आज सभी लोकमित्र ठगा सा महसूस कर रहे है सभी के लिए सरकार ने कुछ न कुछ दिया चाहे आंगनबाड़ी हो या आशा वर्कर हो परन्तु आज तक लोकमित्र की सुध किसी भी राजनितिक पार्टी ने नही ली आज लोकमित्र की हालत ऐसी हो गई है कि लोकमित्र साथियों को अपने परिवार के गुजारे के लिए दिन रात मेहनत करने के बाद भी सही मेहनताना न मिलने के कारण बुरी हालातों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महोदय से प्रार्थना है कि लोकमित्र के लिए कोई सही पॉलिसी इस बजट सत्र में लाई जाये जिस से समस्त लोकमित्र को सही दिशा मिल सके जिस से लोकमित्र भी अपने परिवार का सही भरण पोषण कर सके।

गौरतलब है वर्ष 2002 - 2003 के दौरान मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एंड आईटी द्वारा ग्रामीण स्तर तक ऑनलाइंन सुविधाएं देने के लिए केंद्र सरकार ने शुरुआत की थी । जिसके अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में लोक मित्र केंद्रों के संचालन के लिए जीएनजी व जूम डेवलपर कंपनियों ने मिलकर यह जिम्मा उठाया था ।

जिस के निमित्त कंपनियों ने लोक मित्रों से ₹22000 तक की राशि सिक्योरिटी रूप में ली थी लेकिन कंपनियों की पैसों को ले कर हेरा फेरी के चलते वर्ष 2012 में इन कंपनियों को हिमाचल सरकार में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था।

हालांकि कंपनियां सिक्योरिटी रूप में लिए गए पैसों को वापस करने में नाकाम रही फिर भी प्रदेश सरकार इस विषय में कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी । 2012 के उपरांत मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एंड आईटी के सहयोग से कॉमन सर्विस सेंटर सीएससी ने इसका पूर्ण जिम्मा ले लिया जिसके चलते सीएससी ने अपना पोर्टल तैयार किया और पेमेंट के लिए स्टेट कोऑपरेटिव बैंक को गेटवे के रूप में अधिकृत किया ।

^पोर्टल पर अत्याधिक बोझ होने के कारण लोक मित्र केंद्रों को काम करने में खासी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि वर्तमान में लोक मित्र केंद्र मात्र नकल जमाबंदी व बिजली के बिल ही जमा करवा पा रहे हैं जिसके साथ एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज के कार्य , हमीरपुर चयन बोर्ड के कार्य भी इसमें सम्मिलित हैं लेकिन उन कार्यों को पूरा कर पाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर अक्षम है ।

पूर्व में प्रदेश सरकार ने लोकमित्रों के ब्रॉउडबैंड , बिल में सबसिडी देने के साथ - साथ मानदेह देने का भी भरोसा दिलाया था लेकिन अफसोस सरकार के वो वादे भी खोखले ही साबित हुए।सरकार के प्रस्तावित एजेंडे में ई-डिस्ट्रिक्ट जिसमें एक नागरिक से जुड़े समस्त प्रमाण पत्रों सहित ड्राइविंग लाइसेंस, संस्थाओं के पंजीकरण सहित कई कार्य सम्मिलित है लेकिन अफसोस सरकार अब तक प्रदेश के आईटी के इस विभाग को उस स्तर तक ले जाने में नाकाम है।

सरकार ने वर्तमान बजट में दिहदीदारों से लेकर कर्मचारियों तक के मानदेह से लेकर भत्तों तक में बढ़ोतरी की है लेकिन डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने वाली दूरगामी योजना की इस पहली सीढ़ी को दरुस्त करने का विचार तक नहीं किया।

अगर प्रदेश सरकार लोकमित्रों और कॉमन सर्विस केंद्रों के लिए कोई ठोस नीति बनाए तो आमजन को लाभ तो होगा ही साथ ही दफ्तरों का अतिरिक्त बोझ भी शून्य हो जाएगा।

जब इस संदर्भ में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार राम लाल मारकंडा से बात हुई तो उन्होंने कहा कि लोकमित्रों का कोई भी प्रतिनिधिमंडल अब तक मुझसे नहीं मिला है। हालांकि यह विषय ध्यान में है कि डिजिटल इंडिया को ग्राम स्तर तक पहुंचाना व लागू करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है ।लोकमित्र केंद्रों को व कॉमन सर्विस केंद्रों को स्थाई व प्रभावी रूप से चलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है भविष्य में इनके लिए ठोस नीति बनाने पर सरकार विचार कर रही है।

पोर्टल पर विद्या स्टोक्स की फोटो होने की बात को लेकर उन्होंने कहा कि हमें खुद हैरानी है कि महज एक दिन के लिए विद्या स्टोक्स की फोटो कैसे पोर्टल पर दिख रही थी।वर्तमान में पोर्टल पर ऐसी कोई भी त्रुटि नहीं है।

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