टाण्डा मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है गुरुदेव सिंह

टाण्डा मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है गुरुदेव सिंह

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 10 Dec, 2018 10:08 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर काँगड़ा स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश (मोनु राष्ट्रवादी)

"मतलब की दुनिया में कौन किसी का होता है परछाई भी साथ छोड़ जाती है जब अंधेरा होता है" सदियों से चली आ रही इस लोकोक्ति को गुरुदेव सिंह नाम के एक व्यक्ति के जज्बे ने कलयुग के दौर में चरितार्थ नहीं होने दिया है। मानवता की मिसाल लिए गुरदेव सिंह डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टाण्डा में असहाय मरीजों के लिए मनचाहे वरदान से कम नहीं।

निस्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए गुरुदेव सिंह मरीजों ही नहीं टीएमसी में कार्यरत डॉक्टरों की भी आंख का तारा है । जख्मों की ताव को न सहते हुए चीख पुकार करते मरीजों के लिए निस्वार्थ भाव से डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में कोई हाथ मदद की ओर बढ़ता है तो समझ ले हाथ किसी और का नहीं बल्कि उना जिला से ताल्लुक रखने वाले गुरुदेव सिंह का है।

साधारण सी वेशभूषा में दिखने वाला 48 वर्षीय गुरुदेव सिंह कोई नेता नहीं बल्कि इसी संस्थान में कार्यरत एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं लेकिन अपने प्रोफेशन के साथ-साथ मानवता को भी कायम किए हुए हैं । गरीब, मजदूरों और असहाय मरीजों के लिए सदा तत्पर रहने वाला यह कर्मचारी टीएमसी को मंदिर सरीखे मानता है।

मेडिकल कॉलेज टांडा में बाहर से आए मरीजों के लिए उनकी पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टरों की खोज तक मरीजों और तीमारदारों को लाने ले जाने में अपनी खुशी समझने वाले गुरुदेव सिंह ने करीबन 22 वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज टांडा में अपनी सेवाएं शुरू की थी। इतना ही नहीं तीमारदारों को रात्रि ठहराव के लिए गद्दा गद्दा रजाई से लेकर चटाई तक उपलब्ध करवाने का पूरा जिम्मा तक अपने कंधे पर उठा रखा है। इसके लिए उन्होंने एक समाज सेवी संगठन सेवा भारती का भी जिम्मा सम्भाले हुआ है।

चंबा जैसे दूरस्थ इलाके अथवा अन्य पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले अनपढ़ देहाती लोगों को डॉक्टरों से लेकर विशेषण इत्यादि की सेवाओं से लाभान्वित करने का पूरा जिम्मा गुरदेव सिंह ने अपने कंधों पर उठा ले कर रखा है जो उन्हें सरकारी सेवा में अपनी ड्यूटी के साथ-साथ मरीजों के बीच मानवता के भाव से सदा जोड़ा रखता है ।

दिनभर मरीजों की सेवा में तल्लीन रहने वाला गुरदेव सिंह कोई साधु महात्मा नहीं है बल्कि उनका भी अपना एक भरा पूरा परिवार है ।परिवार में धर्म पत्नी के अलावा उनकी दो बेटियां भी है जिनमें एक मेडिकल में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है लेकिन ड्यूटी खत्म होने के उपरांत भी गुरदेव सिंह डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा के बराबर चक्कर लगाता रहता है और इस दौरान मेडिकल कॉलेज में आने वाले असहाय मरीज का हाथ थाम कर इसे उसके उचित इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचाए बिना वे अपने घर की चौखट नहीं लांघते।

 आपके इस जज्बे के लिए हिमाचल जनादेश आपका तहदिल से स्वागत करता है ,सलाम करता है। गुरदेव !

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